MoralStoryHub में आप सभी पाठकों का हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन है हम आशा करते हैं कि आप स्वस्थ एवं सुरक्षित होंगे हमेशा की तरह आज हम फिर बेस्ट मोरल स्टोरी इन हिंदी pdf download | गरीब का नसीब Hindi Moral Stories इस पोस्ट के माध्यम से एक नई कहानी के साथ आपके सामने हाजिर हैं आज के इस कहानी में आप एक गरीब की नसीब के बारे में पढ़ेंगे। हम आशा करते है आपको यह मोरल स्टोरी पसन्द आएगी। 


जैसा की आप परिचित है हम प्रत्येक कहानी के अंत मे आप सभी के लिए कहानी की पीडीएफ फ़ाइल देते है। जिसको आप डाउनलोड करके आराम से कहानी का आनंद ले सकते है। 


गरीब का नसीब Hindi Moral Stories
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महादेव एक गरीब बूढ़ा मछुआरा था। उसके परिवार में उसकी बूढ़ी पत्नी सती के अलावा और कोई नहीं था। आज 3 दिन से सती बुखार से तप रही थी। महादेव के पास इतना पैसा भी नहीं था कि उसका इलाज करवा सके। उस दिन वह सुबह जल्दी उठ गया। एक बार उसके सिर पर हाथ रखा उसे अभी भी बुखार था। 


उसने अपना मछली पकड़ने वाला जाल और बाल्टी उठाई और नदी पर मछली पकड़ने चल दिया। नदी के किनारे पहुंचकर उसने अपना जाल डाल दिया और मछली के फसने का इंतजार करने लगा वहां एक और मछुआरा छगन अपनी नाव पर सवार होकर मछली पकड़ रहा था। 


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महादेव को देखकर छगन बोला अरे बाबा किनारे बैठने से बड़ी मछली नहीं मिलेगी। नदी के थोड़ा अंदर आओ तो हो सकता है कि कोई बड़ी मछली फंस जाए। 


तभी महादेव बोला - नही बेटा, न तो मेरे पास नाव है और न ही शरीर मे ताकत। की मैं बीच नदी में जाके मछली पकड़ सकू। अब सब कुछ भगवान के ऊपर है। अगर अब उन्होंने चाहा तो मुझे बड़ी मछली जरूर मिलेगी। 


छगन ताने मरता हुआ बोला - तो फिर बैठे रहो घाट को पकड़कर भगवान तुम्हारे लिए लाल परी मछली भेजेंगे। लाल परी मछली एक  बहुत ही नयाब मछली होती है जिसकी कीमत लाखों रुपए में होती है। ऐसी मछली किसी भाग्यवान को ही मिलती है सबको नहीं मिलती है।

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एक बार जिसे लाल परी मछली मिल जाती है उसकी किस्मत ही चमक जाती है। खैर, महादेव ने छगन के बातो पर कोई ध्यान नहीं दिया और काफी देर इंतजार करने के बाद उसने अपना जाल खींचा। उसका जाल भारी लग रहा था। 


उसने सोचा लगता है कोई बड़ी मछली फ़ंसी है मगर जैसे ही उसने जाल को बाहर खींचा उसका सारा जोश ठंडा पड़ गया। जाल में मछली तो क्या एक घोंगा भी नहीं फसा था। उसकी जगह उसमें ढेर सारा कचरा जैसे प्लास्टिक कपड़े साडे पुराने जूते और चप्पल फंसे थे।


यह सब देख कर छगन हंस पड़ा और बोला - अरे वाह बाबा वाह बहुत बड़ा खजाना हाथ लग गया है तुम्हारे अगर इसी तरह रोज खजाना मिलता रहा तो 1 दिन तुम जरूर रहीस बन जाओगे लेकिन महादेव ने फिर उसकी बातों पर कोई ध्यान नहीं दिया और अपने मन ही मन में बोला कि हे भगवान कैसे लोग हैं तुम्हारी दुनिया के। 


जो नदी हमको पीने को पानी और खाने को खाना देती है उसमें लोग न जाने क्या-क्या गंदगी डाल देते हैं इतना सोच कर उसने फिर से जाल डाला इस बार उसके जाल में थोड़ी सी छोटी मछलियां फंस गई लगातार मेहनत करने से महादेव का पूरा शरीर थक गया था।


इसलिए उसके जाल में जो मछलियां खाती थी उसको समेटकर महादेव बाजार की ओर चल पड़ा दिनभर महादेव ग्राहकों का इंतजार करता रहा मगर मछलियों का छोटे होने के कारण उसे मछली खरीदने कोई नहीं आया बाकी मछुआरों की मछलियां बड़ी-बड़ी थी ग्राहक भी उन्हीं के पास जा रहे थे।


और उनकी मछलियां देखते देखते बिक गई तभी महादेव सोचता है कि हे भगवान शाम होने को आई है अब तो बाजार भी उठने लगा है एक भी ग्राहक नहीं आया सोचा था थोड़े से पैसे आ जाएंगे तो सती के लिए खाना और दवाइयां ले लूंगा बिचारी बुखार से तड़प रही है।


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अभी महादेव यह सोच ही रहा था कि वहां एक आदमी आया और उससे पूछा कि बाबा यह मछलियां कितने की है तभी महादेव बोलता है कि बेटा यह मछलियां तो है ₹200 की मगर मैं तुम्हें इन सभी मछलियों को डेढ़ सौ में दे दूंगा तभी वह आदमी बोलता है कि बाबा डेढ़ सौ तो महंगा है।


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मैं तो इनकी केवल ₹100 ही दे पाऊंगा वैसे भी बाजार बंद होने वाले हैं अब तुम्हारी मछलियां कोई खरीदने से तो रहा नहीं इससे पहले कि यह सब छड़ जाए और खराब हो जाए इन्हें तुम मुझे ₹100 में दे दो। 


मरता क्या न करता, आखिरकार महादेव को उस आदमी को सारी मछलियां ₹100 में ही देनी पड़ गई करता भी क्या बेचारा। तब तक पहुंच चुका बाजार भी तब तक उठ चुका था महादेव ने भी अपना दुकान समेटा और वहां से घर चल दिया। अभी वह बाजार से निकल भी नहीं पाया था। 


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तभी उसके कानों में एक आवाज आई, बाबा! बाबा! इस कंगले की भी सुनते जाना 3 दिन से भूखा हूं कुछ भी नहीं खाया बाबा। मुझ पर दया करो बाबा, अभी महादेव ने मुड़कर देखा कि एक अंधा अपाहीज सड़क के किनारे बैठा था उसके दोनों आंखें खराब थी और दोनों पैर भी बेजान थे जैसे 2 सूखेे डंठल महादेव को उस पर दया आ गई।


अफाहिज को केले देते हुए

फिर महादेव ने उसे अपनी फटी चादर वह दी और पास के ठेले से कुछ केले लेकर दे दिया उसको खाने के लिए। और बोला कि लो यह कुछ केले हैं तुम्हारे लिए इसको खा लो इससे तुम्हारी भूख मिट जाएगी तभी वह अपाहिज आदमी बोला कि तुम मुझ जैसे अपाहिज पर इतनी दया दिखा रहे हो कौन हो बाबा।


महादेव उसको अपने बारे में बताता है तभी वह अपाहिज व्यक्ति अपने जेब से कुछ दाने निकालता है और उसको महादेव को देते हुए बोलता है कि तुमने बिना किसी स्वार्थ की एकं कंगले की मदद की है बाबा। भगवान तुम्हें इसका फल जरूर देगा। लो यह दाने रख लो कल जाल डालने से पहले इन दानों को नदी में छिड़क देना।


महादेव उस अपाहिज व्यक्ति से दाना ले ले लेता है और अपने पास रख लेता है और दोबारा उस व्यक्ति को उस फटी चादर को अच्छे से उड़ा देता है और अपने घर की ओर चल पड़ता है। घर पहुंचते उसे देखा कि सती की तबीयत अब पहले से बेहतर थी। 


यह देखकर महादेव को थोड़ी राहत मिली उसने खाना बनाना शुरू किया उसने अपने लिए थोड़ी सी मछलियां बचा कर रखी थी मछली के साथ उसने आज खरीदे हुए चावल और थोड़े से आलू बनाए और सती को खिलाया सती को खिलाकर और सुलाने के बाद जैसे वह खुद खाने बैठा।


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को देखते ही महादेव के विवाह गांव का कुत्ता कालू आ गया कालू को देखते ही महादेव की चेहरे पर मुस्कान फैल गई वह कालू को कुछ काटते हुए बोला - क्यों कालू बेटा भूख लगी है ठहर मैं तुम्हे खाने को देता हूं। इसके बाद वह अपने हिस्से से बचे हुए एक हिस्से को कालू को दे देता है। 


एक अरसे से महादेव ऐसा ही करता आ रहा था वह जब भी खाने बैठता हमेशा महादेव कालू के साथ मिल बाट कर खाना खाता। खाना खाकर कालू वहां से चला गया और महादेव भगवान का नाम लेकर सो गया। अगली सुबह वो फिर अपना जाल लेकर मछली पकड़ने चल दिया। 


नदी किनारे पहुंचकर उसे उस जाने की याद आई जो कल उसे उस अपाहिज व्यक्ति ने दिए थे उसने उसके कहे अनुसार उन दानों को नदी में बिखेर दिया और फिर वहां अपना जाल डाल दिया अभी थोड़ी देर हुए थे कि अचानक लगा कि जैसे जाल में कोई भारी चीज फंसी है।


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महादेव गुजराल को खींचने लगा मगर बूढ़ा होने के कारण महादेव से वह जाल खींचा नहीं जा रहा था। मगर जैसे तैसे करके काफी देर के बाद महादेव उस जाल को नदी से बाहर निकाला। जाल को देखते ही उसकी आंखें चौंधीया गई।


लाल परी मछली मिली

जाल में एक बड़ी सी लाल परी मछली फंसी थी छगन मछुआरा भी यह सब देख रहा था। लाल परी मछली को देखकर उसकी आंखें आश्चर्य से फट पड़ी उसने मन ही मन मे सोचा -अरे बाप रे! इतनी बड़ी लाल परी मछली। 


अगर यह मुझे मिल जाय तो हफ्ते भर की कमाई एक ही दिन में हो जाए इस बुड्ढे से किसी भी तरह यह मछली छीन लेनी चाहिए। उधर छगन की दुष्टता से अनजान महादेव किसी तरह उठाकर उस मछली को वहां से जा रहा था।


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तभी उसको अचानक से एक जोर का झटका लगा और वह बुरी तरह जमीन पर गिर गया और मछली  भी उसके हाथ से छूट गई। छगन ने महादेव को धक्का दिया था और लाल परी मछली लेकर भागा।


महादेव चिल्लाया - अरे चोर चोर कोई पकड़ो उसे वह मेरी मछली लेकर भागा जा रहा है कोई पकड़ो उसको मगर वहां कोई भी नहीं था जो महादेव की मदद कर सके मगर अगले ही पल ना जाने कालू वहां कहां से आ गया भागते हुए छगन पर टूट पड़ा उसने कई जगह-जगह को काट खाया।


और छगन छगन दर्द से चिल्ला उठा उसका चिल्लाना सुनकर आसपास के रहने वाले लोग वहां भागे आए इतने सारे लोग के सामने अपनी पोल खुलने से छगन वहां से डर कर भाग गया और लाल परी को वही छोड़ दिया। तब तक महादेव भी वहां पहुच गया। 


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लोगों ने उस मछली को महादेव को सौंप दिया। मछली बहुत बड़ी है अगर मैं उसका छोटा सा हिस्सा काटकर अपने लिए भी रख लो तो बाजार में इसकी अच्छी खासी कीमत मिल जाएगी मुझे। यह सोचकर महादेव मछली को घर ले आया। 


मछली की पेट से निकला लाल रूबी

जैसे ही वह मछली को काटा तो उसके पेट मे निम्बू के आकार और सुर्ख लाल रंग का पत्थर 'रूबी' निकला। माणिक को देखते ही महादेव की आंखें चुंधिया गयी। हे भगवान! इतना बड़ा माणिक पत्थर इसकी कीमत तो लाखों में होंगी।


इसे पाकर तो मुझे सारी जिंदगी कोई काम करने की जरूरत ही नही पड़ेगी। ये जरूर उस रोज अपाहिज़ के द्वारा दिये गए उस दानो का कमाल है। इसलिए इस माणिक में एक हिस्सा उस अपाहिज का भी है। 


ये सोचकर महादेव उसी जगह पहुचा जहाँ उस रोज उसे वह अपाहिज व्यक्ति मिला था। मगर अब वहां कोई नही था। वह बस महादेव की फटी चादर पड़ी थी। लोगो से पूछने पर महादेव को पता चला कि लोगो ने वहां आजतक किसी अपाहिज को नही देखा।


तभी महादेव ने सोचा कि अगर यह किसी ने आज तक अपाहिज़ व्यक्ति को नही देखा तो वह उस दिन जो मुझे मिला था वह व्यक्ति को था। क्या स्वयं भगवान थे मेरी मदद को आये थे और मेरी किस्मत को चमक दिया। 


इस घटना के बाद महादेव की पूरी काया ही पलट गई । अब उसे किसी भी प्रकार की कोई कमी नही थी। वह अपनी पत्नी सती और कुत्ते कालू के साथ सुकून के साथ जीवन यापन करने लगा। साथ ही साथ दिल खोलकर दीन दुखियों की मदद भी करने लगा। न जाने दुखी के भेश में कौन मिल जाए। 


कहानी से शिक्षा - हमे इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि हमे सदैव अपनी मेहनत  और ईश्वर पर विश्वास रखना चाहिए। साथ ही दीन दुखियों की भी मदद भी करना चाहिए। जरूरी नही की आप करोड़पति हो तभी दीन दुखियों की मदद करे। आपके पास जो है वो ही उनके लिए काफी है।


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